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धनखड़ की धाकड़ जीत, राजस्थान के किसान पुत्र चुने गए 14वें उपराष्ट्रपति, PM मोदी ने दी बधाई



(G-वार्ता)

 देहरादून। राजधानी से शनिवार को सूत्रों के हवाले मिली ताजा जानकारी के मुताबिक  नई दिल्ली में  शनिवार को उपराष्ट्रपति चुनाव 2022 हुए। आज संसद भवन दिल्ली में मतदान सुबह 10.00am बजे से शाम 5.00pm बजे तक मतदान हुंआ। वही इस अवसर पर इस चुनाव में कुल 725 वोट पड़े। वही जिसमें  NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़,  को 528 वोट मिले। तो वहीं विपक्ष की उम्मीदार मार्गरेट अल्वा को 182 वोट के साथ संतुष्ट होना पड़ा।

इस दौरान वोटो की गिनती में 15 वोट अमान्य घोषित किए गए। और फिर वही इस मौके पर जगदीप धनखड़ को  उपराष्ट्रपति चुनाव 2022 का विजेता घोषित कर दिया गया। इस दौरान  धनखड़,  को प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की। वही जिसमें  725 सांसदों ने अपने वोट डाले।जबकि दोनों के बीच कोई कड़ी टक्कर नहीं थीं।

इस दौरान धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद  पर विजय होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी है।  साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, “किसान पुत्र जगदीप धनखड़ अपनी विनम्रता के लिए जाने जाते हैं।  उनके पास क़ानूनी, विधायी और गवर्नर के पद से जुड़े अनुभव हैं। उन्होंने हमेशा किसानों, युवाओं, महिलाओं और वंचितों की भलाई के लिए काम किया है.। 

बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत लगभग 93 फीसदी सांसदों ने मतदान किया, जबकि 50 से अधिक सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया.

बता दे कि भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है! भारत के उपराष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति भी होते हैंण्मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को ख़त्म हो रहा है।  वही अब जगदीप धनखड़ देश के नए उपराष्ट्रपति के रूप में 11 अगस्त 2022 को शपथ लेंगे।

 प्राप्त जानकारी के मुताबिक NDA   गठबंधन सहयोगियों के अलावा, आंध्र प्रदेश के सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी, मायावती की बहुजन समाज पार्टी बसपा, और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बीजू जनता दल ने धनखड़ को समर्थन देने का संकल्प लिया। अल्वा, जो सभी विपक्षी दलों के समर्थन की उम्मीद कर रहे थे, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मी के खिलाफ यशवंत सिन्हा का समर्थन किया था।

अब परिणाम सामने आने के साथ, धनखड़ 11 अगस्त को भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। वेंकैया नायडू का कार्यकाल एक दिन पहले यानी 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है।



मिडिया रिपोर्ट  के मुताबिक धनखड़ 1989 के लोकसभा चुनाव में झुंझुनू से सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने 1990 में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. वह वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में मंत्री भी रहे. 1991 में धनखड़ जनता दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए. वहीं, 1993 में वह अजमेर के किशनगढ़ से विधायक बने. इसके बाद 2003 में वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. जुलाई 2019 में धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था

बता दे कि 16 जुलाई 2022  को, NDA  ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री जद्गीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया। उन्हें टक्कर देने के लिए अगले ही दिन विपक्ष ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और गोवा, राजस्थान और गुजरात के राज्यपाल को अपना संयुक्त उम्मीदवार घोषित कर दिया।

बता दे कि  धनखड़ 71 वर्ष के हैं और वह राजस्थान के प्रभावशाली जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनकी पृष्ठभूमि समाजवादी रही है। जनता दल (JDU), वाईएसआर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अन्नाद्रमुक और शिवसेना ने धनखड़ का समर्थन करने की घोषणा की है और इनके समर्थन से NDA उम्मीदवार को 515 के करीब मत मिलने का अनुमान जताया जा रहा है।

मिडिया रिपोर्ट  के मुताबिक  टीएमसी के रुख और विपक्ष में फूट के माहौल को देखते हुए मुकाबला बिल्कुल एकतरफा नजर आ रहा है यानी पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल धनखड़ की जीत सुनिश्चित लग रही है। विपक्षी दलों में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने अल्वा के नाम की घोषणा से पहले सहमति नहीं बनाने की कोशिशों का हवाला देते हुए मतदान प्रक्रिया से दूर रहने की घोषणा की है। बता दे कि विपक्ष की उम्मीदार मार्गरेट 80 वर्षीय अल्वा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भी काम किया है।

 प्राप्त जानकारी के मुताबिक संसद में सदस्यों की मौजूदा संख्या 788 है, जिनमें से केवल भाजपा के 394 सांसद हैं। जीत के लिए 390 से अधिक मतों की आवश्यकता होती है। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा और चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा किया गया। इस चुनाव में खुले मतदान की कोई अवधारणा नहीं है और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव में किसी भी परिस्थिति में किसी को भी मतपत्र दिखाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वर्ष 1974 के नियमों में निर्धारित मतदान प्रक्रिया में यह प्रावधान है कि मतदान कक्ष में वोट पर निशान लगाने के बाद मतदाता को मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालना होता है।

Aman Singh

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