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सरकार ने विपक्ष के मुद्दों का नहीं दिया जवाब: यशपाल आर्य

(G-वार्ता)

बाजपुर।नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा गैरसैंण में आहूत बजट सत्र में उपलब्ध कम समय में उठाने के लिए कहा कांग्रेस विधानमंडल दल ने प्रश्न काल, कार्य स्थगन, बजट पर सामान्य चर्चा और अन्य स्वीकृृत नियमों के अन्र्तगत बेरोजगारों  के उत्पीड़न, नकल माफिया, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, जोशीमठ सहित प्रदेश के अन्य स्थानों की आपदा, प्रदेश भर के भूमिधरी आदि मामलों को उठाया और इन सभी मामलों में सरकार विपक्ष के प्रश्नों का सीधा जबाब देने से भागती रही।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, इस बार राज्य की जनता को आशा थी कि, सत्र लंबा चलेगा लेकिन सरकार ने पूर्व में घोषित अवधि से दो दिन पहले सत्र ही सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर यह सिद्ध कर दिया कि, राज्य के सर्वोच्च सदन विधायिका के द्वारा राज्य की जनता के बड़े प्रश्नों को हल करने में उसकी कोई रुचि नहीं है।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, सरकार ने बजट में इस वित्तीय वर्ष मंे 19 हजार 460 करोड़ रुपए का ऋण लेने का अनुमान लगाया है। 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद यदि सात सालों में लिए सरकार द्वारा लिए गए कर्ज को जोड़ा जाय तो यह 99 हजार 749 करोड़ रुपया होता है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताया  कि, राज्य बनने के बाद 17 सालों में सभी सरकारों ने 2017 तक केवल 35 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था और 2017 के बाद भाजपा सरकारों के 7 सालों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, सरकार ने सदन में विपक्ष के इस प्रश्न का जबाब भी नहीं दिया कि, वह सदन के माध्यम से राज्य की जनता को बताऐ।नेता प्रतिपक्ष ने कहां 22 सालों में लिए गए कर्ज में राज्य पर आज लगभग एक लाख 20 करोड़ से अधिक कर्जा निकलेगा।नेता प्रतिपक्ष ने कहां राज्य का इस साल का बजट केवल 77 हजार 407 करोड़ का है और राज्य पर कर्ज उससे कही अधिक 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए के लगभग का है तो आप सभी राज्य की आर्थिक स्थिति को समझ सकते हैं।उन्होंने कहा कि ,हमने आंकड़ो  7 साल में लिए एक लाख रुपए के कर्ज से राज्य में क्या उत्पादकता हुई ? कितने नए रोजगारों का सृृजन हुआ ? कौन सी जनकल्याणकारी योजना चलाई ? तो सरकार ने इन प्रश्नों का कोई जबाब नहीं दिया। 

       नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ,कोरी घोषणाओं व जुमलेबाजी के इस बजट में वित्तीय प्रबन्धन का नितांत अभाव है इसलिए उत्तराखण्ड राज्य पर कर्ज उसके सालाना बजट के आकार से कही अधिक हो गया है। कर्ज और देनदारी को कुल सकल घरेलू उत्पाद याने जी0एस0डी0पी0 का 25 प्रतिशत तक रखने की राजकोषीय उत्तरदायित्व एंव बजट प्रबंधन अधिनियम (एफ0आर0बी0एम0) की सीमा को उत्तराखण्ड 2019-2020 में ही लांघ चुका है। उन्होंने कहा सरकार की आटसटैंडिग लाइबलिटीज जी0एस0डी0पी0 का 28.2 प्रतिशत हो जायेगी। जो खतरे के संकेत से 3.2 प्रतिशत अधिक है।

खर्च कर रहे हैं। इस साल के बजट में इस साल 77 हजार करोड़ के बजट में से सरकार अनुमानित रुप से 17388 करोड़ रुपऐ याने लगभग 15 प्रतिशत केवल पुराना कर्ज और ब्याज देने में ही खर्च कर देगी।उधारी और ब्याज चुकाने के बाद 2023-2024 में 66 हजार 179 करोड़ रुपए के खर्चों में से उत्तराखण्ड राज्य बाध्यकारी खर्चों याने वेतन , पंेशन और ब्याज अदायगी पर ही इस वित्तीय साल में 32 हजार 583 करोड़ रुपए खर्च कर देगा। इन व्ययों को राजस्व व्यय भी कहते हैं। जो कुल प्राप्तियों का 57 प्रतिशत है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि , 66 हजार करोड़ के खर्चे में से 50 हजार करोड़ कर्ज वापसी, ब्याज अदायगी,वेतन, पेशंन आदि अनुत्पादक कार्यों में खर्च होने के बाद वह राज्य के लोगों के विकास की आकांक्षा , सामाजिक उत्तरदायित्वों और रोजगार सृृजन का कार्य कैसे करेगी।प्रेस वार्ता में पूर्व नेता प्रतिपक्ष विधायक प्रीतम सिंह,विधायक फुरकान अहमद ,श्रीमती ममता राकेश,श्रीमती अनुपमा रावत ,वीरेंद्र जाति, रवि बहादुर,प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि उपस्थित थे।

Aman Singh

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