रुद्रपुर। वर्ष 2010 में हुए एक भाषण के मामले में कथित वीडियो के आधार पर प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय व प्रो शौकत शेख हुसैन पर जनविरोधी, काले कानून यूएपीए के तहत 2024 में मुकदमा दर्ज करने के विरोध में भाकपा (माले) ने आज जिलाधिकारी कार्यालय में महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया।
इस दौरान जिला सचिव ललित मटियाली ने कहा कि प्रख्यात लेखिका अरुंधति रॉय और डॉ. शौकत हुसैन के विरुद्ध 2010 के एक प्रकरण में यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति, दिल्ली के उपराज्यपाल महोदय द्वारा दे दी गयी है. यह हैरत में डालने वाला और हास्यास्पद निर्णय है. पूरे 14 वर्ष बाद यूएपीए जैसे कानून में मुकदमा चलाने की अनुमति देना, कानून का अनुपालन नहीं बल्कि सीधे तौर पर शक्तियों का दुरुपयोग है।
सिर्फ बोली गयी बातों के मामले में यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति देना और वह भी बोले जाने के 14 साल बाद कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता है।
यह स्पष्ट तौर पर भिन्न मत रखने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला है. वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा अपने विरोधी विचार के लोगों को इस तरह के केसों में फंसा कर, उन्हें बरसों-बरस बिना मुकदमा चलाये जेलों में बंद रखने की यह परिपाटी, पिछले एक दशक से इस देश में चल रही है. अरुंधति रॉय और डॉ.शौकत हुसैन पर मुकदमा चलाने की अनुमति देना, एनडीए सरकार के इस कार्यकाल की पहली कार्यवाही है, जो बता रही है कि यह सरकार, दमनकारी क़ानूनों के दुरुपयोग के मामले में पुराने ढर्रे पर ही चलेगी. इस तरह की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
भाकपा(माले) नगर सचिव एडवोकेट अमनदीप कौर ने कहा कि लेखिका अरुंधति रॉय और डॉ. शौकत हुसैन के विरुद्ध यूएपीए के तहत मुकदमा चलाये जाने की अनुमति तत्काल निरस्त की जानी चाहिए और यूएपीए जैसे दमनकारी क़ानूनों को रद्द किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दुराग्रह और मतभिन्नता के चलते गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाये।
इस दौरान भाकपा के पूर्व जिला मंत्री एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, इंकलाबी मजदूर केंद्र के नगर सचिव दिनेश , केहरी सिंह, अखिलेश सिंह, विजय, चंद्रिका आदि लोग मौजूद थे।
