रुद्रपुर। नगर में स्थित प्राचीन अटरिया मन्दिर इस समय अपने चरम पर है वही दूर-दूर से हर रोज हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर अटरिया माँ के दरबार मे हाजिरी लगा रहे है वही आज हम बात करेंगे मन्दिर के मुख्य द्वार पर स्थित वृक्ष की। बताते चले कि जिस पेड़ के नीचे माता का आदेश प्राप्त हुआ वह पेड़ आज भी अटरिया माता के मंदिर में विराजमान है। इसकी खास बात यह है की इस पेड़ की प्रजाति का किसी को कोई भी अंदाजा नहीं है। इस प्रचीन पेड़ में वटवृक्ष, पीपल, नीम, आम और बरगत सभी एक साथ नज़र आते हैं। जिस कारण से इसको पंच बृक्ष भी कहा जाता है
यह वृक्ष आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है जिसका कोई नाम नहीं दे सकता, क्योकि इसमे कौन सा पेड़ कहा से निकल कर जुड़ रहा है यह कहना सम्भव नही है ।इस पेड़ में को पंच बृक्ष कहा जाता है इसमें वटवृक्ष ,पीपल ,नीम आम और बरगत एक साथ नजर आते हैं। इस पेड़ की मंदिर प्रांगड़ में अलग ही छटा है। पेड़ की लताएं स्वयं बयान करती हैं कि पेड़ सेकड़ो वर्ष से भी अधिक पुराना होगा, क्योंकि इसकी लताये 30 फीट ऊपर जाकर फिर नीचे मंदिर के गेट को छूकर अपने पुराने होने का बोध भी कराती हैं।
यह पेड़ अटरिया मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित है जहां पर लोग अपनी मन्नत को पूरा कराने के लिए पेड पर लालचुन्नी से गांठ बांधकर अपनी मन्नत माँगते हैं, और अपनी मन्नत पूरी होने के उपरांत इस गांठ को उसी प्रकार से खोलते है।
