राष्ट्रीय नजरिया न्यूज़

22 वर्ष बाद भी सपना मात्र ही है शहीदों के सपनो का उत्तराखंड..

सरकारें बदलीं पर हालात नही बदले, पलायन आज भी गम्भीर स्थिति में, आज भी अन्य प्रदेशों में रोजगार ढूंढ़ रहे है युवा प्रदेश के युवा..

(रिपोर्ट:- आशु अहमद, G-वार्ता)

बाजपुर। उत्तराखंड के *प्रथम राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता किसान नेता जगतार सिंह बाजवा* ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि आज उत्तराखंड युवा प्रदेश है लेकिन राज्य गठन से आज तक बनी सरकारें राज्य के लोगों की उम्मीदों पर खरी नही उतर पाईं। प्रदेश में सरकारें तो समय-समय पर बदलती रही लेकिन राज्य के युवाओं और महिलाओं की स्थिति नहीं बदल पाई। आज भी रोजगार के नाम पर राज्य से पलायन जारी है वही महिला सुरक्षा की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है राज्य में शिक्षा स्वास्थ्य व सड़कों की स्थिति भी बदतर है। अभी तक सरकार बनाने व बचाने के खेल में राजनीतिक दलों ने प्रदेश का बहुमूल्य समय बर्बाद कर दिया है। प्राकृतिक संसाधनों व युवा शक्ति, राज्य की खेती,पर्यटन के क्षेत्र में भी कोई विशेष उपलब्धि राज्य हासिल नहीं कर पाया। आज भी अन्य प्रदेशों में उत्तराखंड के युवा अपना भविष्य ढूंढते नजर आ रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

 उत्तराखंड राज्य का गठन राज्य के प्रत्येक नागरिक के आंदोलन युवाओं और महिलाओं के बलिदान से संभव हो पाया था लेकिन राजनीतिक दलों ने शहीदों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया है।

शहीदों के सपनों का उत्तराखंड आज भी एक सपना मात्र बनकर ही रह गया जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

 उत्तराखंड राज्य के युवाओं व महिलाओं को जो लड़ाई उत्तराखंड राज्य को पाने के लिए लड़नी पड़ी थी शायद वही लड़ाई अब उत्तराखंड राज्य को बचाने के लिए करनी पड़ेगी।

Aman Singh

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